पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में दिल्ली से दलाल की गिरफ्तारी, कईयों की मिलीभगत पर हो सकता है खुलासा

बताया जा रहा है कि आरोपी मामले का खुलासा होने के बाद से अंडर ग्राउंड हो गया था। आरोपी लगातार अपनी लोकेशन भी बदल रहा था, लेकिन आरोपी के पीछे लगी एसआईटी ने आखिरकार उसे दिल्ली में धर दबोचा।

पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में दिल्ली से दलाल की गिरफ्तारी, कईयों की मिलीभगत पर हो सकता है खुलासा

ऊना: हिमाचल पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती पेपर लीक मामले में एक ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई है, जिससे पुछताछ के बाद कई पर्दाफाश होने वाले हैं। मामले में गठित एसआईटी ने आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। ऊना जिला के नकडोह निवासी युवक इस पूरे मामले में दलाल बताया जा रहा है। 

गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान विपिन 35 निवासी कैलाश नगर वार्ड एक डाकघर नकडोह तहसील घनारी जिला ऊना के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि आरोपी मामले का खुलासा होने के बाद से अंडर ग्राउंड हो गया था। आरोपी लगातार अपनी लोकेशन भी बदल रहा था, लेकिन आरोपी के पीछे लगी एसआईटी ने आखिरकार उसे दिल्ली में धर दबोचा। 

दलाल के ऊना निवासी होने पर जिला के अभ्यर्थियों से संपर्क होने की संभावना भी है। खैर अब पुछताछ में आरोपी से प्रश्न पत्र बांटने को लेकर गहन पुछताछ होगी। हालांकि इस गिरफ्तारी को लेकर पुलिस ने मीडिया को कोई भी आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। ऊना जिला में परीक्षा में उत्तीर्ण करीब तीन दर्जन अभ्यर्थियों पर पुलिस को शक हैं। पुलिस ने अभ्यर्थियों से पूछताछ जारी रखी है। 

सवालों के दायरे में पुलिस भी
पेपर लीक मामले ने पुलिस पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। मामले में 15 गिरफ्तारियां होने के बाद भी यह पता नहीं चल रहा कि पेपर किसने और कैसे लीक करवाया। प्रिंटिंग प्रेस में इतनी बड़ी गलती किसी की मिलीभगत के बगैर संभव होना बेहद मुश्किल है। ऐसे में किसी पुलिस ऑफिसर पर शक होना लाजमी है।  

वहीं, बताया ये भी जा रहा है कि पेपर लीक होने की बात एक आईपीएस अधिकारी को तीन मई को ही पता थी, लेकिन मामले में एफआईआर दो दिन बाद दर्ज की गई। आईपीएस अफसर ने चार मई को बाकायदा डीआईजी सुमेधा द्विवेदी को पत्र लिखकर मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखा। डीआईजी ने अनुमति के लिए डीजीपी को पत्र भेजा और मामला फिर भी उजागर नहीं किया गया। पेपर लीक की बात मुख्यमंत्री को भी दो दिन बताई गई। 

ऐसे में सवाल कई उठते हैं, आखिर मुख्यमंत्री से दो दिन जानकारी क्यों छुपाई गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद पहले जो एसआईटी बनाई गई, उसमें एसपी कांगड़ा और डीआईजी सुमेधा द्विवेदी को क्यों बाहर रखा गया। दबाव बनने के बाद एसपी कांगड़ा को एसआईटी में शामिल किया गया, लेकिन डीआईजी को फिर भी एसआईटी से बाहर रखा गया। दो दिन तक मामले की जानकारी होने के बावजूद मामले में कोई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी बताया जा रहै है कि एक पुलिस अधिकारी के रिश्तेदार ने भी पैसे देकर लिखित परीक्षा का प्रश्न पत्र हासिल किया है। हालांकि इस पूरे विषय पर जांच चल रही है और पड़ताल पूरी होने के बाद ही पूरा सच सामने आ पाएगा।