वनदुर्गा के दर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, बाघल रियासत की आस्था का केंद्र है श्री बनिया देवी

अर्की विधानसभा क्षेत्र रियासत काल या फिर राजा-महाराजाओं के समय बाघल रियासत के नाम से जाना जाता था और उसी समय से यहां के लोगों की श्री बनिया देवी में अटूट श्रद्धा और आस्था बरकरार है।

वनदुर्गा के दर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, बाघल रियासत की आस्था का केंद्र है श्री बनिया देवी
सिद्धपीठ बनिया देवी (डिजाइन फोटो)।

सोलन/अर्की: आज देशभर में चैत्र नवरात्रि महाअष्टमी यानी दुर्गा अष्टमी की खूब धूम रही। आदिशक्ति श्री दुर्गाजी के अष्टम रूप श्री महागौरी के पूजन के हम पहुंचे थे बाघल रियासत की कुलदेवी श्री बनिया देवी के दर पर। जी हां, अर्की विधानसभा क्षेत्र रियासत काल या फिर राजा-महाराजाओं के समय बाघल रियासत के नाम से जाना जाता था और उसी समय से यहां के लोगों की श्री बनिया देवी में अटूट श्रद्धा और आस्था बरकरार है। हरे-भरे वृक्षों से घिरा बनिया देवी का ऐतिहासिक मंदिर बेहद शांत जगह पर बना है। 

मंदिर के इतिहास की बात किसी और दिन, आज बात अष्टमी के अवसर पर मंदिर में उमड़े श्रद्धालुओं की। मंदिर में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी रही। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा की। श्रद्धालुओं ने मां को हलुआ, पूरी, काले चने एवं नारियल का भोग लगाया। चुनरी और श्रृंगार का सामान अर्पित कर सुख-शांति की कामना की। मंदिर में पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए लंगर का प्रबंध भी किया गया था। 

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बनिया देवी में मुख्य मंदिर के अलावा भैरव नाथ, जाल्पा माता, ग्यासी माता मंदिर और शिवलिंग भी स्थापित की गई है। बनिया देवी पहुंचने वाले श्रद्धालू इन मंदिरों में भी जरूर अपनी हाजिरी लगाकर आर्शीवाद प्राप्त करते हैं। हजारों लोगों की कुलदेवी बनिया देवी बाघल रियासत की आस्था का केंद्र मानी जाती है।