साल 2019 में दी परीक्षा, आज तक कर रहे रिजल्ट का इंतजार, अधर में 30 हजार युवाओं का भविष्य

जेबीटी कमिशन पोस्टकोड 721 के 617 पदों को भरने के लिए प्रक्रिया साल 2019 में शुरू की गई थी। 12 मई 2019 को लिखित परीक्षा आयोजित करवाई गई, जिसमें 30 हजार अभ्यर्थियों ने टीचर बनने का ख्वाब देखा। मगर, अभी तक परीक्षा परिणाम का इंतजार है..

साल 2019 में दी परीक्षा, आज तक कर रहे रिजल्ट का इंतजार, अधर में 30 हजार युवाओं का भविष्य

हमीरपुर: प्रदेश के 30 हजार अभ्यर्थियों ने तीन साल पहले परीक्षा दी, लेकिन परिणाम का इंतजार आज दिन तक कर रहे हैं। सुस्त कार्यप्रणाली के आगे अब परीक्षा परिणाम के इंतजार में बैठे परिक्षार्थियों के सब्र का बांध भी टूटने लगा है। शनिवार को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से अभ्यर्थी सुस्त कार्यप्रणाली और लचर व्यवस्था का जवाब मांगने के लिए हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर पहुंच गए।  

दरअसल, जेबीटी कमिशन पोस्टकोड 721 के 617 पदों को भरने के लिए प्रक्रिया साल 2019 में शुरू की गई थी। 12 मई 2019 को लिखित परीक्षा आयोजित करवाई गई, जिसमें 30 हजार अभ्यर्थियों ने टीचर बनने का ख्वाब देखा। मगर, यकीन मानिए, तीन साल का वक्त बीत जाने के बाद भी जेबीटी कमिशन का परिणाम घोषित नहीं हो पाया है। ऐसे में हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका है। अभ्यर्थियों को भविष्य की चिंता सता रही है, लेकिन कोई सुध लेने वाला ही नहीं है। 

शनिवार को हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर पहुंचे अभ्यर्थी बताते हैं कि बैचवाइज आधार पर जेबीटी नौकरी में लग गए हैं और कमिशन देने वालों को तीन साल बाद भी इंतजार करना पड़ रहा है। अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने 12 मई 2019 को जेबीटी कमिशन के 617 पदों को भरने के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में भाग लिया था। 30 हजार के लगभग अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा दी थी और इसमें बीएड के प्रशिक्षु भी शामिल थे। बीएड प्रशिक्षुओं को पात्र बनाए जाने के चलते अभी तक मामला माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि इस भर्ती प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए, ताकि अधर में अटकी इनकी भविष्य की नैया पार लग सके। 

आपको बता दें कि प्रदेश भर के स्कूलों में जेबीटी के लगभग चार हजार पद रिक्त चल रहे हैं और अभ्यर्थी घर बैठ कर मानो खाख छानने को मजबूर हों। हिमाचल में ये अकेली ऐसी भर्ती प्रक्रिया नहीं है, बल्कि कई भर्ती परिक्षाएं विवादों की भेंट चढ़ रही हैं। बस सवाल प्रदेश में रोजगार और युवाओं के भविष्य का है, जिसकी जवाबदेही यकीनन सरकार की बनती है।