यात्रियों के चेहरे पर मुस्कान ला रही उत्तराखंड पुलिस, दिन हो या रात,DGP से लेकर कॉन्स्टेबल आपके साथ

उत्तराखंड पुलिस के ये वो चंद प्रयास है जो हम इस खबर में आपको बता रहे हैं। अगर उत्तराखंड पुलिस का हर सेवा भाव का काम हम खबर में लिखने बैठ जाएं तो शायद आज का दिन कम पड़ जाएगा।

यात्रियों के चेहरे पर मुस्कान ला रही उत्तराखंड पुलिस, दिन हो या रात,DGP से लेकर कॉन्स्टेबल आपके साथ
उत्तराखंड पुलिस बन रही मददगार।

पहाड़ प्राइम डेस्कः उत्तराखंड में चार धाम यात्रा पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं को कई दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है। लेकिन जब से यात्रा शुरू हुई है तब से लेकर अब तक यात्रियों की अगर कोई सबसे ज्यादा मदद कर रहा है तो वो है उत्तराखंड पुलिस के जवान। 

6 मई को 11वें ज्योतिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। 6 मई से लेकर अब तक चाहे किसी भी धाम की बात की जाए, उत्तराखंड पुलिस के जवान गर्मी हो या सर्दी या फिर बारिश। 

उत्तराखंड पुलिस के जवान हर मौसम यात्रियों को ना केवल कानून व्यवस्था का पालन करवा रहे हैं बल्कि इंसानियत की मिसाल भी पेश कर रहे हैं। डीजीपी अशोक कुमार खुद 6 मई को केदारनाथ धाम पहुंचे और मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। 

डीजीपी ने सबसे पहले भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था को देखा और वही से एक रोडमैप तैयार किया कि कैसे श्रद्धालु आराम से बाबा के दर्शन कर सकें। डीजीपी अशोक कुमार खुद भीड़ में नजर आए। वो इसलिए ताकि उन्हें पता चल सके कि कैसे यात्रियों को मुश्किलात का सामना करना पड़ता है। 

चार धाम यात्रा पर जेबकतरा गिरोह भी सक्रिय रहा है। लेकिन उत्तराखंड पुलिस ने ना केवल ऐसे लोगों पर कार्रवाई की बल्कि कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं का सामान और पैसा वापस लौटाया। उत्तराखंड पुलिस बुजुर्गों की सेवा करने में भी पीछे नहीं रही। जहां जरूरत पड़ी वहां अपने मजबूत कंधों पर उठाकर बच्चों और बुजुर्गों को मुश्किलों से पार किया। 

तल्लीताल में तैनात उत्तराखंड पुलिस के कॉन्स्टेबल अमित गहलोत को जब मॉल रोड पर एक पर्स पड़ा हुआ मिला तो देखा कि उसमें ₹3500 केश और कुछ दस्तावेज थे। अमित गहलोत ने होटल के कार्ड से संपर्क किया और बस मालिक तक उसका पर्स पहुंचाया। पर्स का मालिक उत्तराखंड पुलिस की तारीफ करते नहीं थक रहा था। क्योंकि आज की तारीख में जहां चंद पैसों के लिए भी इंसान का मन फिसल जाता है, उत्तराखंड पुलिस के जवान ने एक मिसाल पेश की। 

7 मई को यमुनोत्री धाम पैदल मार्ग पर घोड़ा स्टैंड के पास 70 साल के मध्य प्रदेश निवासी श्रद्धालु बाबूलाल बेहोश हो गए थे। कॉन्स्टेबल राकेश सिंह ने उन्हें अपनी पीठ पर उठाया। उपचार के लिए प्राथमिक चिकित्सालय पहुंचाया। 

यात्रा सीजन के चलते नेपाल से देहरादून आए 75 साल के एक बुजुर्ग परेशान थे। हेड कांस्टेबल आशीष पटेल ने बुजुर्ग को अपना तमाम काम छोड़कर मसूरी जा रहे एक टेंपो में बिठाया। अपना कर्तव्य निभाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। 

9 मई गुजरात से नैनीताल घूमने आए पर्यटकों का वाहन कालाढूंगी के पास खराब हो गया था। उसमें कई बुजुर्ग सवार थे। बुजुर्ग परेशान हो रहे थे। उत्तराखंड पुलिस के जवानों ने ना केवल खराब वाहन की मरम्मत करवाई बल्कि उन्हें दूसरे वाहन से नैनीताल भी पहुंचाया। 

10 मई को गुजरात से श्री बद्रीनाथ धाम दर्शन करने आए श्रद्धालु की अचानक तबीयत खराब हो गई थी। वह जमीन पर गिर गया था। लेकिन कॉन्स्टेबल विकास, सोनिया ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया और अस्पताल में भर्ती करवाया। 

10 मई को ही बद्रीनाथ दर्शन हेतु आए वृद्ध श्रद्धालु थकान के कारण जमीन पर बैठ गए थे। उन्हें चक्कर आने लगा। लेकिन वहीं पर ड्यूटी दे रहे कॉन्स्टेबल अनूप पोखरियाल ने उन्हें उनके परिजनों के साथ उठाकर सहारा दिया और सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाया। 

बद्रीनाथ धाम आई महिला श्रद्धालुओं ने यात्रा के दौरान अपने कई अनुभव साझा किए। वो उत्तराखंड पुलिस की तारीफ करते नहीं थक रही थी। मुंबई से बद्रीनाथ दर्शन करने आए श्रीमती प्रतिभा पांडेय जी दर्शन करने के बाद अपने साथियों से बिछड़ गई थी। महिला आरक्षी ने उनका धीरज बांधा और उनकी बस और साथियों को ढूंढ निकाला। तब जाकर उन्हें बस में बिठाया। 

झारखंड से परिवार के साथ यमुनोत्री धाम यात्रा पर आए वृद्ध श्रद्धालु की अचानक तबीयत खराब हो गई। कॉन्स्टेबल दिनेश बाबू और महिला कॉन्स्टेबल रेखा ने प्राथमिक चिकित्सा केंद्र ले जाकर उनका उपचार करवाया। 

यमुनोत्री धाम पैदल मार्ग पर पालकी से नीचे उतरने के बाद एक दिव्यांग महिला श्रद्धालु को चलने में दिक्कत आ रही थी। मुख्य आरक्षी गोविंद राम ने गोद में उठाकर मंदिर के दर्शन करवाएं और सकुशल वापस भेजा। 11 मई को 6 साल की आव्या अपने दादाजी के साथ और परिवार के साथ केदारनाथ यात्रा पर आई थी। वो भीड़ में अपने परिजनों से बिछड़ गई। पुलिस उपाधीक्षक विवेक कुमार और आरक्षी भरत नेगी ने मासूम बच्ची को ढूंढ निकाला और उसके परिजनों से मिलवाया।

केदारनाथ यात्रा पर आई एक महिला का घोड़े से गिर जाने पर पैर फैक्चर हो गया था। उनके पति काफी परेशान थे। मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार उन्हें हेलीकॉप्टर से यात्रा करवाई गई और सुरक्षित नीचे भेजा गया।

12 मई को केदारनाथ धाम में आए यात्रियों की भीड़ में सोनप्रयाग में एक पर्स गुम हो गया था। जिसमें 6500₹ केश था। मुख्य आरक्षी प्रदीप राणा ने महिला से संपर्क किया और उनका पर्स वापस लौटया।


 ओडिशा से परिवार के साथ बद्रीनाथ धाम दर्शन करने आई महिला ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण अचानक बेहोश हो गई थी। ड्यूटी पर मौजूद कॉन्स्टेबल अजय रावत और सत्येंद्र ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया और फिर डॉक्टरों को बुलाकर उपचार करवाया ।

13 मई को केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान थारू कैंप के पास गुजरात से आए श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ गई। एसडीआरएम टीम द्वारा उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। 14 तारीख को छत्तीसगढ़ से आई महिला चलने में असमर्थ थी। ड्यूटी पर तैनात निरीक्षक बीएल भारती द्वारा उनको गोद में उठाकर श्री हरि दर्शन करवाए गए।

दक्षिण भारत से केदारनाथ धाम दर्शन करने आए दंपति रास्ते में बिछड़ गए थे। महिला के पास मोबाइल फोन नहीं था। कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था। उनके पति द्वारा बताए गए हुलिए की मदद से कॉन्स्टेबल वंदना और मेघना ने महिला को ढूंढ कर उनके पति से मिलवाया।

झारखंड से बुजुर्ग मीरा देवी केदारनाथ धाम दर्शन के लिए आई थी। वापस धनबाद झारखंड के लिए लौट रही थी। रास्ते में अपने परिजनों से बिछड़ गई। वो काफी परेशान थी। यात्रा पड़ाव गौरीकुंड में मुख्य आरक्षी कमलेश और जगबीर ने उन्हें उनके परिवार से मिलवाया। 

गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोन कार्ड के पास श्रद्धालुओं की बस खराब हो गई थी। आसपास कहीं दुकाने नहीं थी। उत्तराखंड पुलिस के जवानों ने उनके लिए खाने पीने की व्यवस्था करवाई। इतना ही नहीं, केदारनाथ धाम के पास घोड़े के धक्का लगने से 50 मीटर खाई में गिरी महाराष्ट्र निवासी महिला को उत्तराखंड एसडीआरएफ की टीम ने खाई में उतर कर बचाया।

प्राथमिक उपचार दिया गया। 14 मई को डीजीपी अशोक कुमार चार धाम की व्यवस्थाओं का जायजा लेने गंगोत्री हाइवे पर भद्रकाली और बद्रीनाथ मार्ग स्थित चेकपोस्ट का निरीक्षण करते नजर आए। राजस्थान से दर्शन के लिए आए 50 वर्षीय भेरूलाल एक टांग से विकलांग थे। उन्हें पुलिस के जवानों ने उठाकर दर्शन करवाएं।

दिल्ली से चार धाम यात्रा पर आए वृद्ध दंपति को थका देखकर कॉन्स्टेबल अनु पोखरियाल ने मंदिर समिति के सदस्य संजय के साथ वृद्ध माता जी को गोद में उठाकर दर्शन कराने के बाद वापस पहुंचाया।

उत्तराखंड पुलिस के ये वो चंद प्रयास है जो हम इस खबर में बता रहे हैं। अगर उत्तराखंड पुलिस का हर सेवा भाव का काम हम खबर में लिखने बैठ जाएं तो शायद आज का दिन कम पड़ जाएगा। 

शुरुआत से लेकर अब तक उत्तराखंड पुलिस का सेवा भाव कार्य लगातार जारी है। समय-समय पर इमरजेंसी नंबर भी जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में आप सभी से अपील है कि आप भी उत्तराखंड पुलिस का सहयोग करें। यातायात नियमों का पालन करें। यात्रा के दौरान गंदगी ना फैलाएं। एहतियात बरतें। सरकार और प्रशासन के द्वारा दिए गए आदेशों का पालन करें।