घाटी में दिखे हिम तेंदुए के शावक, नाले में खेलते नजर आए नन्हें स्नो लेपर्ड

ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि स्पीति घाटी का वातावरण स्नो लेपर्ड के जनजीवन के लिए बेहतर है। यही वजह है कि आए दिन यहां की पहाड़ियों पर स्नो लेपर्ड घूमते भी नजर आ रहे हैं। इससे पहले भी कामिक व डेमूल के चरागाह के निकट आसपास इनकी मौजूदगी देखी गई।

घाटी में दिखे हिम तेंदुए के शावक, नाले में खेलते नजर आए नन्हें स्नो लेपर्ड
घाटी में दिखे हिम तेंदुए के शावक (फोटो साभार-अजय बन्याल

लाहौल स्पीतिः भारत के हिमालयी राज्यों में 10 से 15000 फीट की ऊंचाई पर बर्फीले क्षेत्र में स्नो लेपर्ड यानी की हिम तेंदुए पाए जाते हैं। बीते कुछ सालों में उच्च हिमालय में मानवीय आवागमन ज्यादा बढ़ा है। पर्यटक व ट्रैकर इस क्षेत्र में पहुंचने लगे हैं। इससे क्षेत्र में प्लास्टिक और अन्य कचरा फैलाए जाने से इसका प्राकृतिक वास प्रभावित होने लगा है।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कार्यक्रम
हिमाचल प्रदेश के बर्फीले क्षेत्रों में भी कई बार बर्फीले तेंदुए देखे गए हैं। इस खूबसूरत जानवर के सरंक्षण के लिए भारत सरकार ने कई अहम कदम बीते कुछ सालों में उठाए हैं। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के तहत वन विभाग उच्च हिमालई क्षेत्र में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कार्यक्रम शुरू कर चुका है। इसके तहत हिमालय में बिखरे कूड़े कचरे को एकत्र कर घाटी वाले क्षेत्रों में नष्ट किया जाता है। यहां के जल स्रोतों को भी संरक्षित किया जाता है। इससे हिम तेंदुए अपनी प्यास आसानी से बुझा सकते हैं।

लाहौल स्पीति घाटी में दो हिम तेंदुए के शावक देखे गए
हिम तेंदूए की बात हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि जिला लाहौल स्पीति घाटी में दो हिम तेंदुए के शावक देखे गए। किब्बर की पहाड़ियों के साथ लगते नाले में यह दोनों शावक खेल रहे थे। स्पीति में कार्यरत सहायक लोक संपर्क अधिकारी अजय बन्याल ने तस्वीरों को अपने कैमरे में कैद किया।

स्पीति घाटी का वातावरण स्नो लेपर्ड के लिए बेहतर
ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि स्पीति घाटी का वातावरण स्नो लेपर्ड के जनजीवन के लिए बेहतर है। यही वजह है कि आए दिन यहां की पहाड़ियों पर स्नो लेपर्ड घूमते भी नजर आ रहे हैं। इससे पहले भी कामिक व डेमूल के चरागाह के निकट आसपास इनकी मौजूदगी देखी गई। वन विभाग की मानें तो बर्फानी तेंदुए स्पीति घाटी के अनुरूप खुद को ढाल लेते हैं और यहां इनकी हलचल देखने को मिल रही है।

सुरक्षा और रिसर्च
स्थानीय लोगों व वन्य प्राणी प्रेमियों और विभाग के प्रयासों से इस दुर्लभ वन्य प्राणी को स्पीति घाटी में प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण मिल रहा है। वन विभाग इनकी सुरक्षा और रिसर्च पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है, तो स्थानीय लोग भी इनकी सुरक्षा में योगदान देते हैं।

क्या कहते हैं सहायक लोक संपर्क अधिकारी
ऐसे में पर्यटकों को भी चाहिए कि वहां पर कूड़ा कचरा ना फैलाएं। स्पीति घाटी में आई वैक्स व ब्लू शीप जैसे जंगली जानवरों के शिकार पर कई तरह के सामाजिक और धार्मिक प्रतिबंध भी है। इनकी तादाद बढ़ने से स्पीती में बर्फानी तेंदुए को आसानी से शिकार मिल जाता है। सहायक लोक संपर्क अधिकारी अजय बताते हैं कि इस बार वह भी स्पीति में बर्फानी तेंदुए को कैमरे में कैद कर चुके हैं।

वन्यजीवों को बचाने में सहयोग
आपको यह भी बता दें कि स्पीति घाटी में किब्बर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी (अभ्यारण्य) सबसे बड़ी है। इसका क्षेत्रफल 2200 वर्ग किलोमीटर है। कुल्लू को लाहौल से जोड़ने वाली पिन वैली की वाइल्ड लाइफ सेंचुरी 675 किलोमीटर है जबकि चंद्रताल सेंचुरी 50 किलोमीटर तक फैली हुई है। हम सभी का फर्ज बनता है कि हम भी इन खूबसूरत वन्यजीवों को बचाने में सहयोग करें।