डरे हुए हैं दलित! अगर गिरीपार को जनजातिय दर्जा मिला तो कहीं ऐसा ना हो, जानें वजह

दलित शोषण मुक्ति मंच के जिला संयोजक आशीष कुमार ने जिदान हत्याकांड का भी जिक्र किया। साथ ही, कुछ आंकड़े मीडिया के सामने रखे।

डरे हुए हैं दलित! अगर गिरीपार को जनजातिय दर्जा मिला तो कहीं ऐसा ना हो, जानें वजह
दलित शोषण मुक्ति मंच पीसी।

नाहनः जिला सिरमौर के गिरीपार को जनजातीय दर्जा मिलने की आस अब जग चुकी है। ऐसे में गिरीपार के लोग काफी खुश हैं। लेकिन दलित शोषण मुक्ति मंच ने आज कुछ ऐसी बातें कही जिसके बाद से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।  

दलित शोषण मुक्ति मंच के जिला संयोजक आशीष कुमार ने आज नाहन में कहा की गिरीपार क्षेत्र में रह रहे अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को इस बात का डर है कि अगर इस क्षेत्र को जनजातीय घोषित किया जाता है तो उनके कुछ अधिकारों को खत्म कर दिया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि गिरीपार में अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के साथ कई बार उत्पीड़न के मामले सामने आ चुके हैं। भेदभाव के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में उन्होंने मांग की कि जनजातीय क्षेत्र घोषित होने के बाद भी एससी-एसटी एक्ट को बरकरार रखा जाए। हालांकि, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जनजातीय घोषित होने से हमें कोई आपत्ति नहीं है।

दलित शोषण मुक्ति मंच के जिला संयोजक आशीष कुमार ने जिदान हत्याकांड का भी जिक्र किया। साथ ही, कुछ आंकड़े मीडिया के सामने रखे। कहा कि सबसे ज्यादा दलितों के साथ भेदभाव के मामले गिरीपार में ही सामने आते हैं। 

इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी कहा कि पंचायती राज के चुनाव प्रणाली के अंतर्गत मिलने वाले आरक्षण को भी बरकरार रखा जाए। इस तमाम मसले को लेकर दलित शोषण मुक्ति मंच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक मांग पत्र भेजा है।

बता दें कि केंद्र से आश्वासन मिलने के बाद गिरीपार की करीब 154 पंचायत के लोग काफी खुश हैं और उन्हें उम्मीद है कि चुनाव से पहले उन्हें जनजातीय दर्जा मिल जाएगा।