विधानसभा गेट पर ना गार्ड था, ना CCTV,खालिस्तानियों ने देखा मौका, लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाने की खुली छूट!

तपोवन स्थित विधानसभा भवन की सुरक्षा में महज चार पुलिस कांस्टेबल और एक सब इंस्पेक्टर तैनात हैं। क्या आप जानते हैं कि लोकतंत्र के इस खूबसूरत मंदिर के बाह्य परिसर में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है।

विधानसभा गेट पर ना गार्ड था, ना CCTV,खालिस्तानियों ने देखा मौका, लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाने की खुली छूट!

पहाड़ प्राइम डेस्क: क्या आप जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश की दोनों विधानसभा जो शिमला और धर्मशाला में स्थित है, उन्हें देश की पहली ई-विधानसभा होने का गौरव प्राप्त है। ई-विधानसभा होने का मतलब है कि यहां पर हर काम पेपरलेस होता है। लेकिन महज लोकतंत्र के खूबसूरत मंदिर को पेपरलेस बताने से क्या होगा, जब मंदिर की सुरक्षा में सजगता शून्य हो। 

साल 2006 में करोड़ों रुपये खर्च कर धर्मशाला में बनाए गए तपोवन स्थित विधानसभा भवन की सुरक्षा में महज चार पुलिस कांस्टेबल और एक सब इंस्पेक्टर तैनात हैं। क्या आप जानते हैं कि लोकतंत्र के इस खूबसूरत मंदिर के बाह्य परिसर में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है, क्या यह सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक नहीं है? 

लोकतंत्र के इस मंदिर में हिमाचल के लोगों के हक की बात होती है, विकास की बात होती है, लोगों की सुरक्षा की बात होती है, नियम-कानूनों की बात होती है। लेकिन लोगों के लिए खड़े किए गए इस मंदिर की सुरक्षा इंतजाम कितने पुख्ता है, यह दो कौड़ी के खालिस्तानी बता गए। शनिवार रात को तपोवन विधानसभा परिसर के मुख्य गेट पर ना तो कोई सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था और ना ही वहां पर कोई सुरक्षा गार्ड तैनात था। ऐसे में खालिस्तानी ही नहीं बल्कि कोई भी लोकतंत्र के मंदिर की गरिमा को ठेस पहुंचा सकता है।

धर्मशाला विधानसभा में हर साल दिसंबर-जनवरी में शीतकालीन सत्र बैठता है। यहां माननीय विधायक और प्रशासन के आला अधिकारी पहुंचते हैं। सत्र के दौरान विधानसभा में पुलिस का कड़ा पहरा रहता है। विधानसभा में सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात किए जाते हैं, लेकिन ये व्यवस्थाएं महज विधानसभा सत्र पूरा होने तक रहती है। उसके बाद तपोवन की सुरक्षा व्यवस्था कैसी होती है, यह दो कौड़ी के खालिस्तानी बता गए। 

यूं तो पुलिस हर दूसरे आदमी को अपने घरों और दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की हिदायत देती है, लेकिन आखिर लोकतंत्र की सबसे बड़ी इमारत में सीसीटीवी कैमरे लगाना प्रशासन कैसे भूल गया। धर्मशाला विधायक विशाल नेहरिया बताते हैं कि विधानसभा परिसर के साथ शहर के अन्य जगहों पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं और यह काम जल्द ही हो जाएगा। लेकिन सवाल यह है विधानसभा भवन सुरक्षा में आज तक सीसीटीवी क्यों नहीं लग पाए। 

विधानसभा परिसर को खालिस्तानी नारों से पोत कर गए दोषियों को ढूंढने के लिए आज आस-पड़ोस में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालना पड़ रहा है। अगर ये कैमरे विधानसभा परिसर में भी लगे होते तो बदमाशों को ढूंढने में शायद ज्यादा देर नहीं लगती, लेकिन शायद सुरक्षा के इंतजाम देखते हुए ही खालिस्तानियों ने विधानसभा परिसर को इस बेहुदगी के लिए चुना। खैर अब यही कहा जा सकता है कि पुलिस मामले में कार्रवाई कर रही है और दोषियों को ढूंढने के लिए प्रयास जारी है।