पुराने बिलासपुर की झलक दिखा रहा कहलूर कॉर्नर, बहुत कम लोगों के घर बची हैं ये विरासतें..

इस बार बिलासपुर जिला प्रशासन द्वारा नलवाड़ी मेले में कहलूर कॉर्नर लगाया गया है। कॉर्नर को लगाने का मकसद है लोगों को बिलासपुर की पुरानी लोक संस्कृति से रूबरू करवाना।

पुराने बिलासपुर की झलक दिखा रहा कहलूर कॉर्नर, बहुत कम लोगों के घर बची हैं ये विरासतें..
कहलूर कॉर्नर में सजी पुरानी वस्तुएं।

बिलासपुर: जिला बिलासपुर में चल रहे सात दिवसीय राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेले में लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक पेश कर रहा है। कहलूर कॉर्नर में रखी वस्तुएं बिलासपुर जिला कुछ दशकों पहले से आज के समय में हुए आधुनिक बदलाव को दर्शाती हैं। 

कहलूर कॉर्नर दर्शाता है कि पुराने समय में जब आधुनिक मशीनें नहीं होती थी, तब किस तरह की वस्तुएं प्रयोग में लाई जाती थी। खाना बनाने के लिए किस तरीके के बर्तन प्रयोग में लाए जाते थे। खेती-बाड़ी के लिए, आटा पीसने के लिए, ऊन से कपड़े बनाने के लिए, सोने के लिए, वजन तोलने के लिए और रोजमर्रा से जुड़े हर कार्य को करने के लिए जिन वस्तुओं का प्रयोग किया जाता था उन सभी वस्तुओं की एक अनोखी प्रदर्शनी कहलूर कॉर्नर में लगाई गई है, जो नलवाड़ी मेले में लोगों को खूब आकर्षित कर रही है।

लोक संस्कृति से रूबरू करवाना मकसद
दरअसल, इस बार बिलासपुर जिला प्रशासन द्वारा नलवाड़ी मेले में कहलूर कॉर्नर लगाया गया है। कॉर्नर को लगाने का मकसद है लोगों को बिलासपुर की पुरानी लोक संस्कृति से रूबरू करवाना। कहलूर कॉर्नर में पूरे जिला भर के लोगों के घरों से कहलूर विरासत से जुड़ी पारंपरिक वस्तुएं एकत्रित कर रखी गई है। 

पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चख रहे लोग
वहीं, बिलासपुर के पारंपरिक व्यंजन भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। जिनका स्वाद चखने के लिए लोगों की खूब भीड़ उमड़ रही है। एनआरएलएम की प्रोजेक्ट डायरेक्टर हिमांशी शर्मा बताती हैं कि कहलूर कॉर्नर में रखा गया पूरा सामान जिला भर के लोगों से एकत्रित किया गया है। इसमें पुराने वस्त्र, बर्तन व आटा पीसने की चक्की सहित अन्य वस्तुएं शामिल हैं। इस कॉर्नर को लगाने का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को बिलासपुर की विरासत और संस्कृति से रूबरू करवाना है।