दशकों पहले अनसेफ घोषित हो चुकी है नैना देवी की पहाड़ी, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने शुरू की ग्रोउनटिंग

1977 में नैना देवी में भारी भूस्खलन हुआ था, जिसके चलते जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने नैना देवी में भारतीय स्टेट बैंक पुराना भवन तक इस पहाड़ी को अनसेफ घोषित कर दिया था, जिसकी रिपोर्ट नगर परिषद के पास उपलब्ध है।

दशकों पहले अनसेफ घोषित हो चुकी है नैना देवी की पहाड़ी, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने शुरू की ग्रोउनटिंग
नैना देवी में पहुंची जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया।

बिलासपुर: विश्वविख्यात शक्तिपीठ में भूस्खलन के खतरे को टालने के उद्देश्य से सोमवार को जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीआईसी) चंडीगढ़ की एक टीम श्री नैना देवी में पहुंची थी। इस दौरान श्री नैना देवी मंदिर के पीछे की पहाड़ी की ग्रोउनटिंग को लेकर सर्वे किया गया और जीआईसी ने अपना कार्य शुरू किया।

दरअसल, मंदिर के पीछे की तरफ पहाड़ी में भूस्खलन और चट्टानें खिसकने का खतरा है। ऐसे में मंदिर के साथ लगती पूरी पहाड़ी की ग्रोउनटिंग के लिए मंदिर न्यास लगातार जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया चंडीगढ़ के साथ संपर्क में था,
। पहाड़ी की ग्रोउनटिंग के लिए कुछ दिनों पहले जीआईसी के डायरेक्टर की मंदिर न्यास के आयुक्त पंकज राय के साथ एक मीटिंग हो चुकी थी, जिसके लिए मंदिर के पीछे के भाग की पहाड़ी को और पक्का करने की कार्य योजना तैयार की जा रही थी। 

1977 में आया था भूस्खलन
वहीं, इससे पूर्व आईआईटी रुड़की इंडिया के एक्सपर्ट के माध्यम से भी इसका एक विजिट करवाया गया था और अब इसका अंतिम सर्वे करवाकर इस कार्य योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। आपको बता दें कि 1977 में नैना देवी में भारी भूस्खलन हुआ था, जिसके चलते जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने नैना देवी में भारतीय स्टेट बैंक पुराना भवन तक इस पहाड़ी को अनसेफ घोषित कर दिया था, जिसकी रिपोर्ट नगर परिषद के पास उपलब्ध है। 

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पानी का रिसाव खतरे की वजह 
पहाड़ी में लगातार रिस रहा पानी और पानी का निकास सही न होने की वजह से खतरा लगातार बना हुआ है। इस पहाडी, पुराने रास्ते और बाजार को बचाने के लिए अभी तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था। अब जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया चंडीगढ़ के साथ मंदिर के पिछले भाग को पक्का करने के लिए इसकी ग्रोउनटिंग करने के लिए नई कार्य योजना तैयार होगी। पूरे मंदिर के चारों ओर पहाड़ी में ग्रोउनटिंग कर इसे मजबूत किया जाएगा, ताकि मंदिर एवं नगर को कोई खतरा ना हो। जीआईसी टीम के साथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष राजकुमार ठाकुर और मंदिर न्यास के सहायक अभियंता प्रेम शर्मा इस दौरान जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया टीम के साथ उपस्थित रहे।