अब हिमाचल में होगा दिल्ली जैसा किसान आंदोलन! हर जिले में जा रहे हैं राकेश टिकैत

राकेश टिकैत इन दिनों हिमाचल दौरे पर है। इसी कड़ी में वो कल बिलासपुर पहुंचे। बिलासपुर में वो एक पत्रकारवार्ता तो संबोधित करते नजर आए।

अब हिमाचल में होगा दिल्ली जैसा किसान आंदोलन! हर जिले में जा रहे हैं राकेश टिकैत
राकेश टिकैत।

बिलासपुरः अब हिमाचल में भी एक बड़ा किसान आंदोलन शुरू होगा। सिरमौर से लाहौल-स्पीति तक किसानों को एकजुट किया जाएगा। जिसके बाद पूरी रूपरेखा तैयार कर हिमाचल में भी आंदोलन के रणमैदान में हिमाचल के किसान उतर जाएंगे। ये तमाम बातें कल बिलासपुर में किसान नेता राकेश टिकैत ने कही। 

राकेश टिकैत इन दिनों हिमाचल दौरे पर है। इसी कड़ी में वो कल बिलासपुर पहुंचे। बिलासपुर में वो एक पत्रकारवार्ता तो संबोधित करते नजर आए।  कहा कि हिमाचल में किसानों की अनदेखी व यहां पर चल रहे रेलवे, फोरलेन व एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्टों में लोगों को सही मुआवजा नहीं मिल पाया है। जिसका विरोध अब किसानों के साथ मिलकर पूरे प्रदेश में शुरू करने जा रहे हैं। 

राकेश टिकैत ने कहा कि बिलासपुर की बात करें तो हिमाचल प्रदेश का पहला ऐसा जिला है, जिसने यहां पर भाखड़ा बांध बनाने के लिए अपने घर तक बलिदान कर दिए। लेकिन आज तक भी इन भूमि का सही मुआवजा स्थानीय लोगों को नहीं मिल पाया है। इसी के साथ हिमाचल में किसानों को फसल की मुआवजा सहित टावर लाइनों का पैसा तक केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा पूरा नहीं दिया गया है। 

इस सारे मसले को लेकर वो एक देशव्यापी आंदोलन पूरे राज्यों में करेंगे। इसी के साथ हिमाचल प्रदेश में जल्द ही दिल्ली का किसान आंदोलन का दूसरा फेस हिमाचल से शुरू होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि कल वो मंडी जिला में जाकर स्थानीय लोगों सहित किसानों से बात करेंगे। उसके बाद वह कुल्लू में जाकर एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। 

उसके बाद वो मनाली व लाहौल-स्पीति के किसानों से भी बातचीत कर उनकी सारी समस्याओं को सुनेंगे। जिसके बाद एक सारा प्रारूप तैयार किया जाएगा और हिमाचल में दिल्ली किसान आंदोलन का दूसरा फेस शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार पूरी तरह से विफल रही है।

उधर, अग्निपथ योजना पर भी टिकैत ने प्रतिक्रिया दी। कहा कि वो इसका विरोध करते है। इस मसले को लेकर वो जल्द ही सरकार से बात करने जा रहे है। सरकार अभी तक भी यह साफ नहीं कर पाई है कि चार साल बाद युवा आर्मी से बाहर निकलकर क्या करेंगे।