हिमाचल घूमने आया पत्रकार, प्रदेश की सड़कों पर क्या खूब लिखा, जरूर पढ़ें

हिमाचल में कई जिलों की सड़कें बेहद खस्ताहालत में है। नेशनल हाईवे को छोड़ दें तो कई जगह पर सड़कों में गड्ढे ही गड्ढे दिखाई देते हैं।

हिमाचल घूमने आया पत्रकार, प्रदेश की सड़कों पर क्या खूब लिखा, जरूर पढ़ें
समीर, पत्रकार।

पहाड़ प्राइम डेस्कः अगर आप हिमाचल की सीमा के साथ लगते इलाकों में रहते हैं तो आप ने पड़ोसी राज्यों की सड़कों को आसानी से देखा होगा। खासकर उत्तराखंड की। उत्तराखंड में सड़कों की हालत पर बेहतरीन कार्य हुआ है।

लेकिन हिमाचल में कई जिलों की सड़कें बेहद खस्ताहालत में है। नेशनल हाईवे को छोड़ दें तो कई जगह पर सड़कों में गड्ढे ही गड्ढे दिखाई देते हैं। कहा जाता है कि किसी भी राज्य का विकास वहां की सड़कों से देखा जा सकता है। 

लेकिन क्या होगा जब कोई पर्यटक हिमाचल आकर सड़कों की दुर्दशा पर चिंतन करें। समीर एक पत्रकार हैं। वो दिल्ली के रहने वाले हैं। छुट्टियां बिताने अक्सर पहाड़ों पर जाते हैं। इन दिनों पहली बार हिमाचल आए हैं। इस बार जब वो हिमाचल आए तो उन्होंने अपने अनुभव को साझा किया। 

पत्रकार बेबाकी के लिए जाना जाता है। तो ऐसे में उन्होंने बेबाकी से हिमाचल की सड़कों पर लिखा है। जो हूबहू हम आपको बता रहे हैं।

वो लिखते हैं कि "अगर आप मर्सडीज़ में बैठकर खटारा बस का अनुभव करना चाहते हैं तो हिमाचल प्रदेश में आ जाइए. हिमाचल की सीमा में प्रवेश करते ही सड़क के नाम पर सिर्फ़ गड्ढे हैं. समझ में नहीं आता कि गड्डों में सड़क है या सड़क में गड्ढे. रास्ता ख़राब नहीं बाहियात है. बाहियात अति बाहियात. जहाँ भारत रोड निर्माण में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है वही हिमाचल को जिस शक्ति ने रोक रखा है? मैंने अपने जीवन में इतना गड्ढों युक्त हाइवे नहीं देखा. पूरे भारतवर्ष से पर्यटक यहां आते हैं. सरकार व जनता की आमदनी होती है. पर्यटक राज्य में ऐसी अव्यवस्था अकल्पनीय है. इस खूबसूरत प्रदेश के नीति निर्माताओं की नीतियां रोड पर पड़े गड्ढों की तरह ही बदसूरत है. कोई भला अपने अतिथियों का स्वागत ऐसी सड़कों से कैसे कर सकता है. 

प्रसाधन की अव्यवस्थाः पूरी रात की खटपट के बाद सुबह बस व्यास व्यू पर टॉइलेट के लिए रोकी जाती है. वहाँ प्रसाधन की व्यवस्था न के बराबर है. वहाँ मौजूद टॉयलेट में महिलाओं की लंबी-लंबी लाइनें लगी थी, और पुरूष खुले में पेशाब कर रहे थे. व्यास व्यू पर एक के बाद एक बसें आ रही थी. व्यास व्यू पर स्वच्छ भारत अभियान की खुले आम धज्जियां उड़ रही थी. 

सुहाने सफर की शुरुआतः शायद भुंतर के आसपास बेहतरीन सड़क शुरू होती है. नदी का साफ पानी और नेचर की खूबसूरती पिछले अनुभवों को भुला देती है. चारों ओर हरियाली आँखों को मंत्रमुग्ध कर देती है. ये वो नज़ारा है जिसे शब्दों में नहीं लिखा जा सकता इसे महसूस किया जा सकता. मनाली के पास अब पहाडों पर बर्फ भी दिखाई देनी शुरू हो जाती है. कहते हैं कि जन्नत कश्मीर में है. लेकिन एक जन्नत हिमाचल में भी है.

प्रसाधन व सड़क बुनियादी सुविधा है सरकार को इस ओर ध्यान देना होगा. हिमाचल प्रदेश कुदरत का सिरमौर है. इसकी खूबसूरती पर धब्बा लगाने का अधिकार किसी के पास नहीं होना चाहिए."