चारधाम यात्रा में अब तक 10 ने गंवाई जान, तीर्थयात्री इन बातों का जरूर रखें ध्यान

मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिंदेश शुक्ला ने बताया कि अभी तक यात्रा मार्ग पर 10 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी हैं। इनमें एक यात्री की खाई में गिरने से मौत हुई है, जबकि अन्य यात्रियों की संभवतः हार्ट अटैक से मौत हुई है।

चारधाम यात्रा में अब तक 10 ने गंवाई जान,  तीर्थयात्री इन बातों का जरूर रखें ध्यान

रुद्रप्रयाग: चारधाम यात्रा के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की मौत का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। अभी तक यात्रा के दौरान 10 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें एक व्यक्ति की खाई में गिरने से मौत हुई है, जबकि अन्य यात्रियों की हार्ट अटैक और ठंड की वजह मौत होना बताया जा रहा है।

गुरुवार को केदारनाथ पैदल मार्ग के लिनचैली के पास कालका प्रसाद गुप्ता निवासी जिला हमीरपुर बुंदेलखंड उत्तरप्रदेश की अचानक तबियत खराब हो गई। तबियत खराब होने के बाद डीडीआरएफ टीम यात्री को गौरीकुंड अस्पताल लेकर आई। यात्री की हालत देख डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिंदेश शुक्ला ने बताया कि अभी तक यात्रा मार्ग पर 10 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी हैं। इनमें एक यात्री की खाई में गिरने से मौत हुई है, जबकि अन्य यात्रियों की संभवतः हार्ट अटैक से  मौत हुई है। उन्होंने कहा कि गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक 16 चिकित्सक तैनात किए गए हैं। यात्रा मार्ग पर 12 एमआरपी हैं। धाम में ती सिक्स सिग्मा, चार विवेकानंद अस्पताल के अलावा एक फिजिशियन और एक चिकित्सक स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैनात किए गए हैं। 

इन बातों पर दें ध्यान

बिंदेश शुक्ला ने  कहा मार तीर्थयात्रियों को केदारनाथ यात्रा पर नहीं आना चाहिए। कुछ तीर्थ यात्री ऐसे भी आ रहे हैं, जिनकी सर्जरी होनी है और वे बिना चिकित्सक की राय के केदारनाथ पहुंच रहे हैं। जबकि इन यात्रियों को बिना डॉक्टरी परामर्श के इतनी कठिन यात्रा पर नहीं आना चाहिए।

बता दें कि केदारनाथ धाम में दोपहर बाद हर दिन मौसम करवट बदल रहा है, जिस कारण तेज बारिश होने के साथ ही हल्की बर्फबारी भी हो रही है। केदारनाथ धाम में जा रहे तीर्थयात्री अपने साथ पूरी व्यवस्था के साथ नहीं जा रहे हैं, जिस कारण उनकी तबियत खराब हो रही है और वे आकस्मिक मौत का शिकार हो रहे हैं।

मौसम खराब होने के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं भी बाधित हो जाती हैं, जिस वजह से उन्हें समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है। जबकि मौसम साफ रहते समय तीर्थयात्री की तबियत खराब होने पर शीघ्र हेलीकॉप्टर से गुप्तकाशी भेजकर तीर्थयात्री की जान को बचाया जा रहा है।